क्यों राहो में आज चलते चलते अचानक थम जाने का मन है ....सुन रहे
कानो से सब कुछ अनसुना कर देने का मन है ....
बादलो ने छुपा ली है रौशनी या सूरज की चमक ही थोड़ी कम है ...
ना जाने क्यों आज थोडा खामोश रहने का मन है.....
खुदा है क्यों आज इतना याद आया ...आंखे क्यों अश्को से नम
है..नाराज़ है मुस्कराहट मुझसे ...या दिल को कोई गम है ...
ना जाने क्यों आज अकेले कहीं चले जाने का मन है ...
ना जाने क्यों आज थोडा खामोश रहने का मन है....
gunjan :)
